वीर सावरकर को सादर नमन

जिन सावरकर जी की लिखी पंक्तियाँ अंदमान जेल से पिछली सरकार ने उखाड़कर फेंक दी थीं, उसी अंदमान जेल में जाकर देश का प्रधानमंत्री सावरकर जी की स्मृति में शीश झुकाता है, ये भी मेरे लिए अच्छे दिन हैं। नकारात्मक विचारों वाले लोग इस बात का हिसाब लगाने और शिकायती स्वर में रोते रहने के लिए स्वतंत्र हैं कि इस सरकार ने क्या-क्या काम नहीं किए। मैं हर मामले में सकारात्मक पहलू को देखने वाला व्यक्ति हूँ और मेरा ध्यान इसी बात पर रहता है कि कहाँ क्या अच्छा हो रहा है। पिछली सरकार से भी मेरी नाराज़गी इस बात …

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पुस्तकें

जीवन में कब, क्या हो जाए, ये कोई नहीं बता सकता। ये बात कम से कम मैंने तो अपने जीवन में सैकड़ों बार महसूस की है। उसका एक पुराना उदाहरण पिछले हफ्ते याद आया, आज समय मिला है, तो सोचा आपको भी बताऊँ। वहाँ पढ़ाई के अलावा बहुत सारी चीज़ें सीखने को मिलीं। लेकिन उनकी चर्चा बाद में कभी करूँगा। आज सिर्फ उनमें से एक चीज़ की बात करनी है। हमारे उस स्कूल में बाकी बातों के अलावा एक बड़ी लाइब्रेरी भी थी। मैंने अपने जीवन में पहली बार कंप्यूटर शायद इसी स्कूल में देखा था, लेकिन मुझे उससे भी …

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श्रीलंका में राजनैतिक संघर्ष

भारत में जब आप पिछले दो महीनों के दौरान कुछ विधानसभा चुनावों की ख़बरें जानने में व्यस्त थे, उसी दौरान श्रीलंका में भी एक बड़ी राजनैतिक हलचल हो रही थी। इसकी शुरुआत २६ अक्टूबर को हुई। राष्ट्रपति मैत्रीपाल श्रीसेन ने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को पद से हटाए बिना ही महेंद्र राजपक्षे को प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया। इसका मतलब एक ही समय पर देश में दो प्रधानमंत्री हो गए। इसके कारण देश में एक बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा हो गया था। रानिल विक्रमसिंघे ने राजपक्षे की नियुक्ति को अवैध बताया और पद छोड़ने से इनकार कर दिया। उन्होंने संसद का सत्र …

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चाय

पी.वी. नरसिंहराव मेरे पसंदीदा राजनेताओं में से एक हैं। वे बहुत विद्वान व्यक्ति थे, कई भाषाओं के जानकार भी थे और अच्छे लेखक व अनुवादक भी। उन्होंने कई भाषाओं में पुस्तकों के अनुवाद किए और कई पुस्तकें स्वयं भी लिखीं। उन्हीं में से एक थी, ‘द इनसाइडर’। हालांकि, नरसिंहराव ने इसे एक काल्पनिक उपन्यास के रूप में लिखा है, लेकिन उसके नायक की कहानी बहुत हद तक उनके स्वयं के जीवन से मिलती-जुलती है। लेकिन आज मैं बात उस पुस्तक की नहीं करने वाला हूँ। बात मैं चाय की करने वाला हूँ। सोशल मीडिया पर कई लोगों की पोस्ट देखकर …

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सोशल मीडिया का राजनैतिक हिंदुत्व

जितने लोग सुबह-शाम भाजपा पर हिंदुत्व से हटकर विकास की ओर भटक जाने का इल्ज़ाम लगाते रहते हैं, उनमें से कितनों ने वाकई पिछले कुछ चुनावों के भाजपा के घोषणा पत्र पढ़े हैं? अगर पढ़े हैं, तो बताएं कि उसमें राम मंदिर या हिंदुत्व पर कितने प्रतिशत फोकस था और विकास पर कितने प्रतिशत था? भाजपा का एजेंडा क्या है, उससे ज्यादा बड़ी समस्या आजकल ये है कि सोशल मीडिया के ज्ञानियों का निजी एजेंडा क्या है। कुछ लोग बिना पढ़े कुछ भी ऊलजलूल लिखकर बाकियों को बहका रहे हैं और कुछ लोग अपने निजी कारणों से जानबूझकर दूसरों को …

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राफ़ेल (भाग – २)

(इस लेख का पहला भाग पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें) इस लेख के पहले भाग में मैंने इस बारे में लिखा था कि राफ़ेल डील की शुरुआत कब हुई, पिछली यूपीए सरकार के समय उसमें किन कारणों से देरी हुई व बाद में मोदी सरकार ने पुरानी डील रदद् करके सीधे फ़्रांस की सरकार के साथ क्यों डील की और १८ के बजाय ३६ विमान खरीदने का निर्णय क्यों लिया गया। लेकिन इसमें रिलायंस की क्या भूमिका है और सरकारी कंपनी एचएएल का नाम इसमें शामिल क्यों नहीं है? क्या सरकार ने अनिल अंबानी को फ़ायदा पहुँचाने के लिए …

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राफ़ेल (भाग – १)

सन २००७। भारत में सोनिया जी की यूपीए सरकार थी। वायुसेना के मिग विमान बूढ़े हो चले थे। सरकार ने इनकी जगह लेने के लिए १२६ नए युद्धक विमान खरीदने की सहमति दे दी। प्रारंभिक प्रस्ताव यह था कि इन १२६ विमानों में से १८ विदेश से बने-बनाए आएँगे और शेष १०८ विमानों का निर्माण भारत की किसी कंपनी के साथ मिलकर किया जाएगा और संभावना यह थी ये काम भारत की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ही करेगी। इसके अलावा इन विमानों के रखरखाव, मरम्मत और सुधार के लिए आवश्यक सुविधाओं का इंतज़ाम भी किया जाना था। अब …

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आपातकाल की यादें (अंतिम भाग) – अरुण जेटली

आपातकाल कैसे हटा? आपातकाल की अवधि बढ़ते जाने के साथ ही इंदिरा जी पर एक बात के कारण दबाव भी बढ़ने लगा था। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विश्व के नेता इस बात से  चकित थे कि नेहरु जी की बेटी ही लोकतंत्र की राह को छोड़कर तानाशाह बन गई थी। अंतरराष्ट्रीय जगत को यह समझाना इंदिरा जी के लिए बहुत कठिन होता जा रहा था कि आपातकाल का दौर वाकई अस्थायी है और हमेशा आपातकाल लागू नहीं रहेगा। हालांकि उनकी पार्टी की राय थी कि चूंकि संसद की अवधि दो वर्षों के लिए बढ़ाई जा चुकी है, इसलिए अब १९७८ से …

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घुसपैठ…

बांग्लादेश का निर्माण: सन १९४७ में भारत का अंतिम विभाजन हुआ और पाकिस्तान बना। आगे १९७१ में हुए युद्ध के बाद पाकिस्तान के भी दो टुकड़े हुए और बांग्लादेश का निर्माण हुआ। इस बारे में मैंने विस्तार से एक लेख लिखा था, जो आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं। १९७१ के युद्ध और बांग्लादेश के निर्माण का मुख्य कारण यह था कि बांग्लादेश के लोगों को यह महसूस होता था कि पाकिस्तान सरकार भाषा, प्रशासन, राजस्व, प्रतिनिधित्व आदि सभी मामलों में बांग्लादेश के साथ भेदभाव करती है। इसे लेकर लगातार आंदोलन चलते रहते थे और उनके दमन के लिए सेना …

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चीन का नया महाद्वीप

पिछले हफ़्ते मैंने “China’s Second Continent” (चीन का दूसरा महाद्वीप) नामक पुस्तक पढ़ी। इसके लेखक एक अमरीकी पत्रकार हॉवर्ड फ़्रेंच हैं। पुस्तक अफ्रीका में चीन द्वारा किए जा रहे निवेश और वहाँ बड़ी संख्या में रहने जा रहे चीनी नागरिकों के बारे में है। पूरे अफ्रीका महाद्वीप के कई देशों में चीन अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है। चीन की मदद से इन देशों में कई सरकारी इमारतें, पुल, स्टेडियम, परिवहन और कृषि व्यवस्था में सुधार आदि कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन परियोजनाओं में काम करने के लिए लाखों की संख्या में चीनी नागरिक इन अफ्रीकी …

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अफ़्रीका में हलचल

कल अपने लेख में मैंने मालदीव के राजनैतिक संकट की बात की थी। आज दक्षिण अफ्रीका की बात करने वाला हूं। इन दिनों वहां भी राजनैतिक हलचल जारी है। लेकिन वहां तक पहुंचने से पहले हमें उत्तर प्रदेश जाना पड़ेगा क्योंकि द.अफ्रीका के कई लोगों की राय है कि उनके देश की वर्तमान सरकार के भ्रष्टाचार के पीछे उप्र के एक परिवार का बड़ा हाथ है। तो आइए आज कुछ नई कड़ियाँ जोड़ने का प्रयास करें। सन १९९३ तक दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद बहुत बड़े पैमाने पर था। कई मामलों में यह केवल सामाजिक ही नहीं था, बल्कि कई मामलों …

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मालदीव का राजनैतिक संकट

मालदीव हिन्द महासागर में बिखरा हुआ एक छोटा-सा देश है। मैं सोच-समझकर ही इसे हिन्दी महासागर में ‘फ़ैला हुआ’ देश नहीं कह रहा हूँ, बल्कि बिखरा हुआ देश कह रहा हूं क्योंकि यह देश वास्तव में यह बहुत छोटे-छोटे १,१९२ द्वीपों की एक श्रृंखला है। वैसे राजनैतिक अर्थ में भी यह बिखरा हुआ देश ही है क्योंकि यहां के शासन में पिछले कई वर्षों से बहुत अस्थिरता ही रही है। पिछले साल मैं कुछ दिनों के लिए मालदीव गया था, उस समय मैंने इस देश के बारे में दो लेख लिखे थे, जो आप यहां और यहां पढ़ सकते हैं। …

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“स्टार्टअप नेशन” (अंतिम भाग)

इस लेखमाला के पिछले २ भागों में हमने इज़राइल की स्टार्टअप कंपनियों की सफलता के कुछ उदाहरण देखे हैं। (पिछले २ भाग आप यहाँ पढ़ सकते हैं: भाग -१ और भाग -२) हमने इस बारे में भी बात की थी कि किस तरह इज़राइल आधुनिक तकनीक के उपयोग, और सरकार, समाज व सेना के आपसी सहयोग के द्वारा इज़राइल में उद्यमिता के लिए अनुकूल माहौल बना, जिसके परिणामस्वरूप इज़राइल आज दुनिया के सबसे विकसित देशों की पंक्ति में पहुंच गया है, जबकि केवल ५०-६० वर्षों पहले तक यह अत्यंत गरीब और संघर्षरत देश था। आइये आज इस अंतिम भाग में …

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“स्टार्टअप नेशन” (भाग २)

इज़राइल की इस विशिष्ट परिस्थिति के कारण इज़राइल के बच्चे-बच्चे को घर में, स्कूल में और सेना की नौकरी में आक्रामकता और नवाचार की सीख मिलती है। धीरे-धीरे यह उसकी आदत ही बन जाती है। इसी कारण लोग कुछ नया करने, नई चुनौतियों को स्वीकारने या जोखिम उठाने में हिचकते नहीं हैं। इसी के परिणामस्वरूप आज इज़राइल कई क्षेत्रों में अपनी उपलब्धियों व सफलताओं के झंडे गाड़ चुका है, और इसमें सेना की बहुत बड़ी भूमिका है।

“स्टार्टअप नेशन” (भाग-१)

इज़राइल का नाम तो आपमें से हर किसी ने सुना होगा, लेकिन अक्सर इज़राइल की चर्चा अरब देशों से होने वाले झगड़ों, या फिर इज़राइल की कृषि की तकनीकों या आधुनिक सैन्य उपकरणों के संदर्भ में ही होती है। लेकिन इस बात पर कितने लोगों का ध्यान गया होगा कि दुनिया भर में स्टार्ट अप कंपनियों के मामले में भी इज़राइल सबसे आगे है? केवल ८० लाख जनसंख्या, लगभग शून्य प्राकृतिक संसाधन, और चारों तरफ के दुश्मन देशों से लगातार युद्ध में उलझे हुए इज़राइल में स्टार्टअप कंपनियों की संख्या भारत, जापान, कोरिया, कनाडा और ब्रिटेन से भी अधिक है। …

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शिमला समझौता

पिछले लेख में मैंने १९४७ में पाकिस्तान के जन्म से लेकर १९७१ में बांग्लादेश के जन्म तक के इतिहास के बारे में संक्षेप में आपको जानकारी दी थी। आज उसके आगे की बात करने वाला हूं। हालांकि कुछ बातों का संदर्भ स्पष्ट करने के लिए बीच-बीच में इतिहास के कुछ अन्य प्रसंगों का भी उल्लेख करूंगा। तो आइये कल की बात को आगे बढ़ाएं। १६ दिसंबर १९७१; केवल १३ दिनों की लड़ाई के बाद ही पाकिस्तान ने घुटने टेक दिए। युद्ध के दौरान वहां का सरकारी मीडिया लोगों को गलत खबर देता रहा कि पाकिस्तान बहुत मज़बूत स्थिति में है …

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विजय-दिवस

सन १९४७ में भारत ?? का विभाजन हुआ और पाकिस्तान ?? जन्मा। तब पाकिस्तान के दो हिस्से थे – एक पश्चिमी पाकिस्तान, जो आज का पाकिस्तान है और दूसरा पूर्वी पाकिस्तान, जो आज का बांग्लादेश है। इस नए राष्ट्र के जन्म के समय पश्चिमी हिस्से की तुलना में पूर्वी पाकिस्तान की जनसंख्या ज्यादा थी। देश की आमदनी में योगदान भी पूर्वी पाकिस्तान का ही ज्यादा था। लेकिन पूर्वी पाकिस्तान के निवासी महसूस करते थे कि उनके योगदान के बदले उन्हें उचित अधिकार और सम्मान नहीं मिल रहा है। बांग्ला भाषा को ऊर्दू जितना महत्व नहीं मिलता था, पूर्वी भाग के …

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भारत-बांग्लादेश भूमि सीमांकन करार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी बांग्लादेश यात्रा के दौरान कल भारत-बांग्लादेश भूमि सीमांकन करार पर हस्ताक्षर किए। इस करार के तहत भारत और बांग्लादेश के बीच ज़मीन की अदला-बदली की जाएगी। सोशल मीडिया पर कई लोग इस बात से नाराज़ हैं कि भारत ने अपने कुछ गाँव, कुछ ज़मीन बांग्लादेश को दे दी है। लेकिन आखिर यह करार क्या है, इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी और इससे भारत का क्या फायदा या नुकसान होगा? आइये इसके समर्थन या विरोध में कोई राय बनाने से पहले इस मामले के सभी पहलुओं को समझ लें। सन 1947 में भारत विभाजन के बाद रेडक्लिफ …

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