चीनी सीमा पर 5G की लड़ाई

कुछ दिनों पहले अभिनेत्री जूही चावला ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी कि भारत में 5G मोबाइल की तकनीक को प्रतिबंधित किया जाए। लगभग सभी को यह पता है कि उनके मुकदमे की सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ और फिर अदालत ने कितना जुर्माना लगाकर उनका मुकदमा खारिज कर दिया। इसलिए मैं उस पर कुछ नहीं कहूँगा। इसके बजाय मैं इस बारे में बात करना चाहता हूँ कि 5G तकनीक क्यों महत्वपूर्ण है और भारत को उसके उपयोग से रोकने का प्रयास वास्तव में देश का कितना नुकसान कर सकता है।

इस समय विश्व के अधिकांश देशों में 4G ही इंटरनेट की सबसे तेज तकनीक है। लेकिन अब केवल लोग ही नहीं, बल्कि उपकरण भी इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं। अब केवल कंप्यूटर और मोबाइल फोन ही नहीं, बल्कि ऐसी कारें, टीवी, माइक्रोवेव, घड़ियाँ और यहाँ तक कि बिजली के बल्ब और प्लग भी बनने लगे हैं, जो  इंटरनेट से कनेक्ट रहते, इंटरनेट से ही नियंत्रित भी किए जा सकते हैं और इतना ही नहीं बल्कि  इंटरनेट के माध्यम से एक उपकरण भी दूसरे उपकरण के संपर्क में रह सकता है और कई तरह की जानकारी भी भेज सकता है।

तकनीक में लगातार हो रही प्रगति के परिणामस्वरूप उपकरणों की क्षमता भी बढ़ती जा रही है और उनके द्वारा भेजी या बटोरी जाने वाली जानकारी की मात्रा भी बढ़ रही है। इंटरनेट के विस्तार के साथ-साथ उसके उपयोग के नए-नए रास्ते खुल रहे हैं और डेटा की खपत भी बढ़ रही है। लेकिन इसकी संभावना का पूरा उपयोग वायरलेस नेटवर्क कनेक्टिविटी और उसके लिए आवश्यक अवसंरचना की क्षमता पर निर्भर है। सरल शब्दों में कहूँ तो आपका फोन भले ही कितना ही बढ़िया हो, किन्तु यदि आपके पास 2G नेटवर्क कनेक्शन है, तो उस धीमे, सुस्त, कमजोर नेटवर्क पर आप अपने फोन की क्षमता का पूरा उपयोग कभी भी नहीं कर पाएंगे। अपने बढ़िया फोन की सुविधाओं का पूरा लाभ उठाने के लिए आपके पास तेज और बढ़िया इंटरनेट कनेक्शन भी होना चाहिए।

उसी प्रकार नए उपकरणों व इंटरनेट के उपयोग से उनका लाभ उठाने की जो नई-नई संभावनाएं रोज उपलब्ध होती जा रही हैं, उनका पूरा लाभ उठाने के लिए भी आज की 4G तकनीक पर्याप्त नहीं है। उसके लिए एक  नई व अत्यधिक उन्नत तकनीक की आवश्यकता है। वही 5G तकनीक है।

5G नेटवर्क केवल इंटरनेट की गति को नहीं बढ़ाएगा। यह वायरलेस कनेक्टिविटी और संचार को पूरी तरह बदलकर रख देगा। इसके आने से नेटवर्क की बैंडविड्थ कई गुना बढ़ जाएगी, डेटा शेयरिंग लगभग तुरंत कर पाना संभव हो जाएगा, नेटवर्क में विलंब पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। 4G से 5G की प्रगति केवल इंटरनेट की गति बढ़ाने की बात नहीं है, यह आज के इंटरनेट को पूरी तरह एक नए युग में पहुँचा देने की बात है।

इस समय पूरे विश्व में 5G तकनीक के मामले में चीन सबसे आगे है। तकनीकी शोध एवं विकास के लिए भी प्रतिवर्ष चीन बहुत बड़ी राशि व्यय करता है। चीन की सरकार ने इस वर्ष 56% और 2025 तक पूरे देश को 5G नेटवर्क से जोड़ देने का लक्ष्य रखा है।

यह लक्ष्य चीन के लिए असंभव नहीं है। वर्ष 2020 में ही चीन ने विश्व का सबसे बड़ा 5G नेटवर्क खड़ा कर लिया था। आज पूरे चीन में सात लाख से अधिक 5G बेस स्टेशन हैं और लगभग 20 करोड़ 5G टर्मिनल कनेक्शन हैं। सामान्यतः आम धारणा यही होती है कि हर तकनीक के मामले में अमरीका दुनिया में सबसे आगे है। लेकिन सच यह है कि चीन का 5G नेटवर्क अमरीका के मुकाबले कम से कम दस गुना बड़ा है। विश्व के अन्य देशों की तो चीन के साथ तुलना भी नहीं की जा सकती।

यह बात सबको समझनी चाहिए कि इस तकनीकी क्षमता का उपयोग केवल इंटरनेट के उपयोग को बेहतर बनाने के लिए नहीं हो रहा है। इसका आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए भी उपयोग किया जाएगा, नए-नए जासूसी उपकरणों के माध्यम से निगरानी करने और यहाँ तक कि दूसरे देशों के खिलाफ युद्ध के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकता है।  

चीन में इंटरनेट और सोशल मीडिया पर तो वैसे भी वहाँ की सरकार का ही पूरा नियंत्रण है। लेकिन विशेष रूप से जिनजियांग, इनर मंगोलिया और तिब्बत जैसे सीमावर्ती इलाकों में ऐसा नियंत्रण और भी अधिक व्यापक व कठोर है।

चीन के आँकड़े बताते हैं कि तिब्बत के 98% से अधिक गाँवों तक 2019 से पहले ही ऑप्टिकल फाइबर, ब्रॉडबैंड इंटरनेट व 4G नेटवर्क पहुँच चुका था। 2020 में चीन ने तिब्बत में 5G नेटवर्क का काम भी बहुत तेजी से आरंभ कर दिया। वहाँ के सभी तहसील और जिला मुख्यालयों में 2020 में ही 5G नेटवर्क पहुँच चुका है और अब उसे पूरे तिब्बत के गाँव-गाँव तक पहुँचाने का काम जारी है।

दूसरी ओर चीन की सेना भी कुछ निजी कंपनियों के साथ मिलकर सीमा पर हाई स्पीड नेटवर्क और कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने का काम कर रही है। समुद्रतल से लगभग सवा 5 हजार मीटर की ऊँचाई पर  ल्होका में विश्व का सबसे ऊँचा मानव-चालित रडार स्टेशन है। चीनी सेना ने यहाँ भी अपना 5G बेस स्टेशन स्थापित कर लिया है, जो कि अपनी पूरी क्षमता से काम भी कर रहा है।

इतने संवेदनशील सीमावर्ती इलाके में बने इस एक 5G रडार स्टेशन के कारण भी चीन की निगरानी व एआई की क्षमता में कई गुना वृद्धि हो गई है। इस 5G रडार स्टेशन के कारण चीनी सेना की संचार क्षमता भी बढ़ गई है व आवश्यकता होने पर सैन्य वाहिनियों तक तेजी से संदेश पहुँचाना या उनकी तुरंत तैनाती करना भी इससे संभव हो गया है।

चीन तो यही कहता है कि तिब्बत की सीमा पर 5G नेटवर्क की व्यवस्था केवल अपने सैनिकों को उनके परिवार से वीडियो कॉल करने जैसी सुविधाएं देने के लिए की जा रही हैं, लेकिन थोड़ी-बहुत सामान्य समझ रखने वालों को भी यह समझने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए कि भारत की सीमा पर स्थित तिब्बत में यदि चीन की सैन्य शक्ति में ऐसी वृद्धि से किस देश को सबसे अधिक खतरा है।

क्या अभी भी आप नहीं समझे कि 5G की अपनी क्षमता विकसित करना और इस तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर बनना भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है?

(स्रोत: द डिप्लोमैट पत्रिका, शिनहुआ समाचार, आईईईई सोसाइटी आदि)

Scroll to Top
%d bloggers like this: