राजनीति

What are India’s new ‘Farm Laws’?

(हिन्दी में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें) First Farm laws in British Raj After Britain’s Industrial Revolution, when a large number of factories were built and rapid industrial production was started, the most important factor to run those factories was to ensure uninterrupted supply of raw material. India was the biggest source of raw material for the British factories during the British Raj (British colonial period in India). The British colonial policy at that time was to force Indian farmers to forcibly cultivate only the crops that were required as raw materials for British industries. Then the farmer had …

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निरीक्षण और निष्कर्ष

एक होता है निरीक्षण और एक होता है निष्कर्ष। ये दोनों अलग बातें हैं। निरीक्षण का मतलब घटनाक्रम को देखना और समझने का प्रयास करना। निष्कर्ष का मतलब उस निरीक्षण के आधार पर अपनी राय तय करना। मैंने स्कूल-कॉलेज पढ़ाई-लिखाई चाहे जिस भी विषय में की हो, लेकिन मैं ऐसा मानता हूँ कि मैं हमेशा से ही भाषा, इतिहास और राजनीति का विद्यार्थी रहा हूँ और आज भी हूँ। राजनीति और इतिहास के मामले में मैं अपनी क्षमता और समझ के अनुसार हमेशा घटनाओं का बहुत बारीकी से निरीक्षण करता हूँ, और आगे के अनुमान लगाने का प्रयास करता हूँ, …

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कृषि कानून का विवाद

(Click here for English version) ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति के बाद जब वहाँ बड़ी संख्या में कारखानों का निर्माण होने लगा और तेजी से औद्योगिक उत्पादन की शुरुआत हुई, तो उन फैक्ट्रियों को चलाने के लिए सबसे आवश्यक बात यह थी कि उन्हें कच्चा माल लगातार मिलता रहे, उसमें कोई बाधा न आए। ब्रिटिश राज में भारत अंग्रेजों के लिए कच्चे माल को हासिल करने का सबसे बड़ा स्रोत था। उस समय उनकी नीति यह थी कि ब्रिटेन की फैक्ट्रियों को जिस कच्चे माल की आवश्यकता हो, अंग्रेज भारत के किसानों से जबरन उसी की खेती करवाते थे और फिर …

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राजीव गांधी: मिस्टर क्लीन या मिस्टर भ्रष्ट?

इंदिरा गांधी की हत्या के कुछ ही घंटों बाद 31 अक्टूबर 1984 को राजीव गांधी भारत के प्रधानमंत्री बनाए गए। डेढ़ महीने बाद ही दिसंबर में लोकसभा चुनाव हुआ और इंदिरा गांधी की हत्या से उपजी सहानुभूति की लहर में कांग्रेस को ऐतिहासिक बहुमत मिला। लोकसभा की 541 में से 414 सीटें कांग्रेस ने जीतीं। कांग्रेस को सीटें इतनी ज्यादा मिली थीं कि लोकसभा में न तो कोई अधिकृत विपक्षी दल था और न कोई नेता प्रतिपक्ष। राज्यसभा में भी कांग्रेस का ही बहुमत था। राजीव गांधी में वाकई कोई अनुभव और क्षमता होती, तो इतने बड़े बहुमत के द्वारा वे …

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वीर सावरकर को सादर नमन

जिन सावरकर जी की लिखी पंक्तियाँ अंदमान जेल से पिछली सरकार ने उखाड़कर फेंक दी थीं, उसी अंदमान जेल में जाकर देश का प्रधानमंत्री सावरकर जी की स्मृति में शीश झुकाता है, ये भी मेरे लिए अच्छे दिन हैं। नकारात्मक विचारों वाले लोग इस बात का हिसाब लगाने और शिकायती स्वर में रोते रहने के लिए स्वतंत्र हैं कि इस सरकार ने क्या-क्या काम नहीं किए। मैं हर मामले में सकारात्मक पहलू को देखने वाला व्यक्ति हूँ और मेरा ध्यान इसी बात पर रहता है कि कहाँ क्या अच्छा हो रहा है। पिछली सरकार से भी मेरी नाराज़गी इस बात …

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सोशल मीडिया का राजनैतिक हिंदुत्व

जितने लोग सुबह-शाम भाजपा पर हिंदुत्व से हटकर विकास की ओर भटक जाने का इल्ज़ाम लगाते रहते हैं, उनमें से कितनों ने वाकई पिछले कुछ चुनावों के भाजपा के घोषणा पत्र पढ़े हैं? अगर पढ़े हैं, तो बताएं कि उसमें राम मंदिर या हिंदुत्व पर कितने प्रतिशत फोकस था और विकास पर कितने प्रतिशत था? भाजपा का एजेंडा क्या है, उससे ज्यादा बड़ी समस्या आजकल ये है कि सोशल मीडिया के ज्ञानियों का निजी एजेंडा क्या है। कुछ लोग बिना पढ़े कुछ भी ऊलजलूल लिखकर बाकियों को बहका रहे हैं और कुछ लोग अपने निजी कारणों से जानबूझकर दूसरों को …

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