इतिहास

इज़राइल-फ़िलिस्तीन संघर्ष (भाग-2)

1948 में इज़राइल की आज़ादी की घोषणा तो हो गई, किन्तु संघर्ष समाप्त नहीं हुआ। इज़राइल को लगातार अपने चारों ओर के शत्रु देशों से लड़ते रहना पड़ा। आज के भाग में पढ़िए आगे का इतिहास।

इज़राइल-फ़िलिस्तीन संघर्ष (भाग-1)

इज़राइल की भूमि पर आधिपत्य के सांप्रदायिक संघर्ष का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। लेकिन इन दिनों जो राजनैतिक संघर्ष चल रहा है, वह लगभग डेढ़ सौ वर्ष पूर्व आरंभ हुआ था।

नेताजी और कांग्रेस

सन 1921 में भारत में ‘असहयोग आन्दोलन‘ चल रहा था। उसी आन्दोलन से प्रेरित होकर 25 वर्ष के नवयुवक सुभाषचंद्र बोस भी लंदन से भारत लौट आए थे। 16 जुलाई को मुंबई पहुंचते ही वे गांधीजी से मिलने मणिभवन गए। वे अपने तीन प्रश्नों के बारे में गांधीजी के विचार जानना चाहते थे: यह असहयोग आन्दोलन अपने अंतिम चरण तक कैसे पहुंचेगा? ब्रिटिश सरकार का बहिष्कार करने से भारत की आज़ादी के लिए आवश्यक दबाव कैसे बनेगा? गांधीजी ने भारत को एक साल में स्वतंत्रता दिलाने का आश्वासन किस आधार पर दिया था? पहले प्रश्न के लिए तो गांधीजी के जवाब से …

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अयोध्या आंदोलन का इतिहास

बाबर के सैन्य अधिकारी बाक़ी तश्कबन्दी का जन्म ताशकंद में हुआ था। 1526 में वह भी बाबर के साथ हिंदुस्तान पहुँचा। पानीपत में सैन्य अभियान के बाद उसे वर्तमान मप्र के चन्देरी में और फिर वहाँ से अवध में एक सैन्य अभियान के लिए भेजा गया। बाबर के आदेश पर भारत में तीन मस्जिदों का निर्माण हुआ था। एक संभल में, एक पानीपत में और एक अयोध्या में। अयोध्या वाली मस्जिद 1528 में रामकोट के एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। प्राचीन काल से ही हिन्दुओं की यह धार्मिक आस्था थी कि उसी मन्दिर का राम चबूतरा ही श्रीराम …

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एक था राजा…

ब्रिटिश भारत की सैकड़ों रियासतों में से “भावल रियासत” भी एक थी। आज यह स्थान बांग्लादेश में ढाका के पास जयदेवपुर में है। उस ज़माने में भावल रियासत पूर्वी बंगाल की दूसरी सबसे बड़ी रियासत थी। इसके अधीन हज़ारों वर्ग किमी भूमि, सैकड़ों गाँव, और लगभग पाँच लाख की जनसंख्या थी। इसकी वार्षिक आय उस ज़माने में लगभग दस लाख रुपये थी। हर लिहाज से यह एक बड़ी महत्वपूर्ण रियासत थी। रियासत के राजा राजेन्द्र नारायण रॉय की कुल छः संतानें थीं: तीन बेटे और तीन बेटियां। सन 1901 में राजेन्द्र नारायण का निधन हो गया। इतनी कमाऊ रियासत पर …

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आपातकाल की यादें (अंतिम भाग) – अरुण जेटली

आपातकाल कैसे हटा? आपातकाल की अवधि बढ़ते जाने के साथ ही इंदिरा जी पर एक बात के कारण दबाव भी बढ़ने लगा था। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विश्व के नेता इस बात से  चकित थे कि नेहरु जी की बेटी ही लोकतंत्र की राह को छोड़कर तानाशाह बन गई थी। अंतरराष्ट्रीय जगत को यह समझाना इंदिरा जी के लिए बहुत कठिन होता जा रहा था कि आपातकाल का दौर वाकई अस्थायी है और हमेशा आपातकाल लागू नहीं रहेगा। हालांकि उनकी पार्टी की राय थी कि चूंकि संसद की अवधि दो वर्षों के लिए बढ़ाई जा चुकी है, इसलिए अब १९७८ से …

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शिमला समझौता

पिछले लेख में मैंने १९४७ में पाकिस्तान के जन्म से लेकर १९७१ में बांग्लादेश के जन्म तक के इतिहास के बारे में संक्षेप में आपको जानकारी दी थी। आज उसके आगे की बात करने वाला हूं। हालांकि कुछ बातों का संदर्भ स्पष्ट करने के लिए बीच-बीच में इतिहास के कुछ अन्य प्रसंगों का भी उल्लेख करूंगा। तो आइये कल की बात को आगे बढ़ाएं। १६ दिसंबर १९७१; केवल १३ दिनों की लड़ाई के बाद ही पाकिस्तान ने घुटने टेक दिए। युद्ध के दौरान वहां का सरकारी मीडिया लोगों को गलत खबर देता रहा कि पाकिस्तान बहुत मज़बूत स्थिति में है …

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विजय-दिवस

सन १९४७ में भारत ?? का विभाजन हुआ और पाकिस्तान ?? जन्मा। तब पाकिस्तान के दो हिस्से थे – एक पश्चिमी पाकिस्तान, जो आज का पाकिस्तान है और दूसरा पूर्वी पाकिस्तान, जो आज का बांग्लादेश है। इस नए राष्ट्र के जन्म के समय पश्चिमी हिस्से की तुलना में पूर्वी पाकिस्तान की जनसंख्या ज्यादा थी। देश की आमदनी में योगदान भी पूर्वी पाकिस्तान का ही ज्यादा था। लेकिन पूर्वी पाकिस्तान के निवासी महसूस करते थे कि उनके योगदान के बदले उन्हें उचित अधिकार और सम्मान नहीं मिल रहा है। बांग्ला भाषा को ऊर्दू जितना महत्व नहीं मिलता था, पूर्वी भाग के …

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