सुमंत

चीनी सीमा पर 5G की लड़ाई

कुछ दिनों पहले अभिनेत्री जूही चावला ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी कि भारत में 5G मोबाइल की तकनीक को प्रतिबंधित किया जाए। लगभग सभी को यह पता है कि उनके मुकदमे की सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ और फिर अदालत ने कितना जुर्माना लगाकर उनका मुकदमा खारिज कर दिया। इसलिए मैं उस पर कुछ नहीं कहूँगा। इसके बजाय मैं इस बारे में बात करना चाहता हूँ कि 5G तकनीक क्यों महत्वपूर्ण है और भारत को उसके उपयोग से रोकने का प्रयास वास्तव में देश का कितना नुकसान कर सकता है। इस समय विश्व के अधिकांश देशों …

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इज़राइल-फ़िलिस्तीन संघर्ष (भाग-2)

1948 में इज़राइल की आज़ादी की घोषणा तो हो गई, किन्तु संघर्ष समाप्त नहीं हुआ। इज़राइल को लगातार अपने चारों ओर के शत्रु देशों से लड़ते रहना पड़ा। आज के भाग में पढ़िए आगे का इतिहास।

इज़राइल-फ़िलिस्तीन संघर्ष (भाग-1)

इज़राइल की भूमि पर आधिपत्य के सांप्रदायिक संघर्ष का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। लेकिन इन दिनों जो राजनैतिक संघर्ष चल रहा है, वह लगभग डेढ़ सौ वर्ष पूर्व आरंभ हुआ था।

काश्मीर की कहानी (भाग-4)

यह विडंबना है कि जिस अब्दुल्ला परिवार के शासन में 1989 में लाखों काश्मीरी पण्डितों को काश्मीर छोड़कर अपने ही देश में शरणार्थी बनना पड़ा, स्वयं उस अब्दुल्ला परिवार के पूर्वज भी कश्मीरी पण्डित ही थे। सन 1766 में एक सूफी मीर के प्रभाव में आने के बाद वे मुसलमान बने और दिसंबर 1905 में उसी परिवार में शेख अब्दुल्ला का जन्म में हुआ। उनके जन्म से दो माह पूर्व पिता की मृत्यु हो गई थी। वह जुलाहों का एक गरीब परिवार था, लेकिन एक मुस्लिम धर्मगुरु ने अब्दुल्ला को पढ़ने के लिए प्रेरित किया और परिवार को मनाया कि …

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बेरोजगारी या अयोग्यता?

मेरे करियर की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी। तब मैं कुछ वेबसाइटों के लिए लेख लिखता था। ये लेख बहुत बेसिक होते थे और पैसे भी बहुत कम मिलते थे। इसलिए मैने सोचा कि कुछ और भी किया जाए। तब मैंने ब्लॉग बनाना नया-नया सीखा था, तो मैंने एक और ब्लॉग शुरू किया और धीरे धीरे वह चल भी गया। कुछ विज्ञापन भी मिलने लगे और थोड़ी बहुत कमाई भी होने लगी। उसी के साथ-साथ मैंने वेबसाइट बनाना भी सीख लिया था और अपनी स्वयं की वेबसाइट भी लॉन्च कर दी थी। उसे देखने के बाद और एक दो …

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काश्मीर की कहानी (भाग-3)

आंग्ल-सिक्ख युद्ध के बाद हुई संधि के तहत अंग्रेज़ों ने 75 लाख रुपये के बदले डोगरा राजा गुलाब सिंह को जम्मू के साथ-साथ काश्मीर व लद्दाख के इलाके भी बेच दिए और इस प्रकार वर्तमान जम्मू-काश्मीर राज्य की सीमाएं बनीं। लेकिन इस संधि के बावजूद भी अंग्रेज़ों ने किसी न किसी बहाने राज्य के कामकाज में दखल देना भी जारी रखा। काश्मीर के लोगों में शुरू से ही यह भावना थी कि डोगरा राजाओं को केवल जम्मू से लगाव है और वे केवल जम्मू के लोगों की चिंता करते हैं, जबकि काश्मीरियों के साथ मुसलमान होने के कारण भेदभाव किया …

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What are India’s new ‘Farm Laws’?

(हिन्दी में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें) First Farm laws in British Raj After Britain’s Industrial Revolution, when a large number of factories were built and rapid industrial production was started, the most important factor to run those factories was to ensure uninterrupted supply of raw material. India was the biggest source of raw material for the British factories during the British Raj (British colonial period in India). The British colonial policy at that time was to force Indian farmers to forcibly cultivate only the crops that were required as raw materials for British industries. Then the farmer had …

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काश्मीर की कहानी (भाग-2)

(पहला भाग यहाँ पढ़ें) आजादी के बाद लगभग 565 रियासतों का भारत में पूर्ण विलय हो गया। लेकिन काश्मीर को लेकर आज तक विवाद क्यों चल रहा है? पढ़िए कश्मीर की पूरी कहानी मेरे ब्लॉग पर। पिछले भाग में मैंने बताया था कि सन 1846 में अमृतसर की संधि हुई और अंग्रेजों ने जम्मू के राजा गुलाब सिंह को ही वहाँ के शासक के रूप में मान्यता दे दी, जो कि सिख-साम्राज्य के काल में भी उस रियासत के प्रशासक थे। जम्मू के अलावा अब अंग्रेजों ने लद्दाख और काश्मीर के इलाके भी 75 लाख रूपये में राजा गुलाब सिंह …

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निरीक्षण और निष्कर्ष

एक होता है निरीक्षण और एक होता है निष्कर्ष। ये दोनों अलग बातें हैं। निरीक्षण का मतलब घटनाक्रम को देखना और समझने का प्रयास करना। निष्कर्ष का मतलब उस निरीक्षण के आधार पर अपनी राय तय करना। मैंने स्कूल-कॉलेज पढ़ाई-लिखाई चाहे जिस भी विषय में की हो, लेकिन मैं ऐसा मानता हूँ कि मैं हमेशा से ही भाषा, इतिहास और राजनीति का विद्यार्थी रहा हूँ और आज भी हूँ। राजनीति और इतिहास के मामले में मैं अपनी क्षमता और समझ के अनुसार हमेशा घटनाओं का बहुत बारीकी से निरीक्षण करता हूँ, और आगे के अनुमान लगाने का प्रयास करता हूँ, …

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भारतीय गणतंत्र के ‘अनिवासी’

भारत के श्यामजी कृष्ण वर्मा पढ़ाई के लिए ऑक्सफर्ड गए और कुछ वर्षों बाद लंदन ही उनका घर बन गया। वहाँ रहकर भी उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए लगातार काम किया। पढ़ाई के लिए ऑक्सफर्ड आने वाले भारतीय छात्रों के लिए स्कॉलरशिप शुरू की। 1905 में इंडियन होम रूल लीग की स्थापना की। भारत से आने वाले छात्रों के लिए लंदन में इण्डिया हाउस शुरू करवाया, जहाँ लाला हरदयाल, वीर सावरकर, मदनलाल ढींगरा और ऐसे न जाने कितने भारतीय क्रांतिकारियों को आश्रय मिला। फिर ब्रिटिश सरकार से बचने के लिए जब उन्हें पेरिस चले जाना पड़ा, तो वहाँ रहकर …

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कश्मीर की कहानी (भाग 1)

ईस्ट इण्डिया कंपनी की स्थापना सन 1600 में 31 दिसंबर को हुई थी। सन 1608 में कंपनी ने सूरत में अपना पहला व्यापारिक केन्द्र स्थापित किया और सन 1757 में प्लासी की लड़ाई के बाद भारत के कुछ इलाकों का शासन भी कंपनी के हाथों में आ गया और अगले सौ वर्षों तक चलता रहा। सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से घबराई ब्रिटिश सरकार ने 1858 में ‘गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट’ नाम से एक नया कानून बनाया भारत का शासन कंपनी के हाथों से छीनकर सीधे अपने नियंत्रण में ले लिया। अब भारत में सरकार चलाने के लिए ब्रिटेन की …

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कृषि कानून का विवाद

(Click here for English version) ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति के बाद जब वहाँ बड़ी संख्या में कारखानों का निर्माण होने लगा और तेजी से औद्योगिक उत्पादन की शुरुआत हुई, तो उन फैक्ट्रियों को चलाने के लिए सबसे आवश्यक बात यह थी कि उन्हें कच्चा माल लगातार मिलता रहे, उसमें कोई बाधा न आए। ब्रिटिश राज में भारत अंग्रेजों के लिए कच्चे माल को हासिल करने का सबसे बड़ा स्रोत था। उस समय उनकी नीति यह थी कि ब्रिटेन की फैक्ट्रियों को जिस कच्चे माल की आवश्यकता हो, अंग्रेज भारत के किसानों से जबरन उसी की खेती करवाते थे और फिर …

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नेताजी और कांग्रेस

सन 1921 में भारत में ‘असहयोग आन्दोलन‘ चल रहा था। उसी आन्दोलन से प्रेरित होकर 25 वर्ष के नवयुवक सुभाषचंद्र बोस भी लंदन से भारत लौट आए थे। 16 जुलाई को मुंबई पहुंचते ही वे गांधीजी से मिलने मणिभवन गए। वे अपने तीन प्रश्नों के बारे में गांधीजी के विचार जानना चाहते थे: यह असहयोग आन्दोलन अपने अंतिम चरण तक कैसे पहुंचेगा? ब्रिटिश सरकार का बहिष्कार करने से भारत की आज़ादी के लिए आवश्यक दबाव कैसे बनेगा? गांधीजी ने भारत को एक साल में स्वतंत्रता दिलाने का आश्वासन किस आधार पर दिया था? पहले प्रश्न के लिए तो गांधीजी के जवाब से …

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अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता की कहानी (भाग-४ )

सोवियत संघर्ष (1979-1989) पिछले भाग में मैंने बताया था कि दिसंबर 1979 में बड़ी संख्या में रूसी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में घुस गए और 27 दिसंबर को प्रधानमंत्री हाफ़िजुल्ला अमीन की हत्या कर दी गई। इस प्रकार अफ़ग़ानिस्तान सोवियत रूस के सीधे नियंत्रण में आ गया। उसी दिन पीडीपीए के नेता बाबराक कारमल ने रेडियो काबुल से यह घोषणा की कि ‘हाफ़िजुल्ला अमीन के क्रूर और हिंसक शासन का अंत हो गया है। उसने यह भी घोषणा की कि अब अफ़ग़ानिस्तान में एक “राष्ट्रीय लोकतांत्रिक सरकार” का गठन होगा, जो समाजवाद के मार्ग पर चलेगी।  जो लोग पिछली वामपंथी सरकार के …

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इनर मंगोलिया में चीनी आतंक?

मंगोलिया का नाम बहुत लोगों ने सुना होगा, लेकिन शायद ‘इनर मंगोलिया’ का नहीं। तिब्बत और शिंजियांग में जो हो रहा है, उसके बारे में तो पूरे विश्व में बहुत चर्चा होती है, लेकिन इनर मंगोलिया के बारे में शायद ही कोई जानता हो। इनर मंगोलिया में चीन के विरुद्ध एक बड़ा आंदोलन शुरू हो गया है।

अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता की कहानी (भाग-३)

पिछले भाग में मैंने आपको बताया था कि 27 अप्रैल 1978 के दिन अफ़गानिस्तान में वामपंथियों ने दाऊद खान का तख्तापलट कर दिया और देश की सत्ता अपने कब्जे में ले ली। यह घटना सॉर (अप्रैल) क्रांति कहलाती है। लेकिन यह रातोंरात नहीं हुआ था। इसकी तैयारी बहुत समय से चल रही थी और उसमें कई लोगों की भूमिका थी। पिछले भाग में मैंने आपको अफ़गानिस्तान की वामपंथी राजनैतिक पार्टी पीडीपीए के ‘खल्क’ और ‘परचम’ गुटों के बारे में भी बताया था, जिनमें आपसी खींचतान और संघर्ष चलता रहता था।  जुलाई 1977 आते-आते ये दोनों गुट समझने लगे थे कि …

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अयोध्या आंदोलन का इतिहास

बाबर के सैन्य अधिकारी बाक़ी तश्कबन्दी का जन्म ताशकंद में हुआ था। 1526 में वह भी बाबर के साथ हिंदुस्तान पहुँचा। पानीपत में सैन्य अभियान के बाद उसे वर्तमान मप्र के चन्देरी में और फिर वहाँ से अवध में एक सैन्य अभियान के लिए भेजा गया। बाबर के आदेश पर भारत में तीन मस्जिदों का निर्माण हुआ था। एक संभल में, एक पानीपत में और एक अयोध्या में। अयोध्या वाली मस्जिद 1528 में रामकोट के एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। प्राचीन काल से ही हिन्दुओं की यह धार्मिक आस्था थी कि उसी मन्दिर का राम चबूतरा ही श्रीराम …

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अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता की कहानी (भाग-२)

लेख के पिछले भाग में मैंने आपको बताया था कि सन 1973 में दाऊद खान ने अफगानिस्तान के राजा ज़हीर शाह के ख़िलाफ़ विद्रोह कर दिया और अफगानिस्तान में राजशाही समाप्त हो गई। ज़हीर शाह उस समय इटली में थे और इस विद्रोह के कारण 2002 तक वे वहीं निर्वासन में रहे। उसी समय से अफगानिस्तान में हिंसा, अस्थिरता और गृह-युद्ध का एक दुःखद अध्याय शुरू हुआ, जो आज तक चल रहा है। दाऊद खान ने ज़हीर शाह के खिलाफ विद्रोह क्यों किया, इसके कई कारण हैं। लेकिन शीत-युद्ध उसका एक बड़ा कारण है। सन 1947 से 1991 तक अमरीका …

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अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता की कहानी (भाग-१)

८ नवंबर १९३३। काबुल के राजमहल में एक समारोह आयोजित था। इस समारोह में अफ़ग़ानिस्तान के राजा मोहम्मद नादिर शाह के हाथों नेजात हाईस्कूल के छात्रों को खेलों में अच्छे प्रदर्शन के लिए मेडल दिए जाने वाले थे। १७ साल का अब्दुल खालिक हज़ारा भी उनमें से एक था। तय समय पर शाह का आगमन हुआ। लोगों का अभिवादन करके उन्होंने टेबल पर सजे मेडलों को देखा और फिर छात्रों की ओर बढ़े। तभी अचानक अब्दुल खालिक ने अपनी जेब से पिस्तौल निकालकर दनादन तीन गोलियां दाग दीं। पहली गोली शाह के मुँह में लगी, दूसरी सीने पर लगी और …

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नेपाल में क्या हो रहा है?

पिछले एक महीने से नेपाल की राजनीति में भारी उठापटक चल रही है। कुछ दिनों पहले आपने समाचार सुना होगा कि नेपाल सरकार ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई थी कि भारत सरकार दो-तीन ऐसे क्षेत्रों को अपना बता रही है जिन पर नेपाल अपना दावा करता है। इसके बाद नेपाल सरकार ने अपने देश का एक नया नक्शा भी जारी किया, जिसमें वे इलाके नेपाल में दिखाए गए थे। नेपाल सरकार इसके लिए अपनी संसद में संविधान संशोधन का प्रस्ताव भी पारित करवाना चाहती थी लेकिन आपसी गुटबाजी के कारण बात बनी नहीं। यह मुझे हमेशा ही बहुत …

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नागरिकता संशोधन अधिनियम-2019 (CAA)

कैब कानून लागू होने से कुछ लोग नाराज़ हैं, कुछ परेशान हैं और कुछ लोग खुश हैं। लेकिन शायद ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं है कि इस कानून में आखिर है क्या! इसलिए मैं आज इस बारे में लिख रहा हूँ। संविधान के अनुच्छेद 5 से 11 में भारत की नागरिकता के नियम बताए गए हैं। ये नियम भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 के द्वारा तय किए गए हैं और समय-समय पर 1986, 1992, 2003, 2005 और 2015 में उनमें संशोधन किए गए हैं। सन 1858 में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट आया था और यहीं से भारत में ब्रिटिश राज …

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एक था राजा…

ब्रिटिश भारत की सैकड़ों रियासतों में से “भावल रियासत” भी एक थी। आज यह स्थान बांग्लादेश में ढाका के पास जयदेवपुर में है। उस ज़माने में भावल रियासत पूर्वी बंगाल की दूसरी सबसे बड़ी रियासत थी। इसके अधीन हज़ारों वर्ग किमी भूमि, सैकड़ों गाँव, और लगभग पाँच लाख की जनसंख्या थी। इसकी वार्षिक आय उस ज़माने में लगभग दस लाख रुपये थी। हर लिहाज से यह एक बड़ी महत्वपूर्ण रियासत थी। रियासत के राजा राजेन्द्र नारायण रॉय की कुल छः संतानें थीं: तीन बेटे और तीन बेटियां। सन 1901 में राजेन्द्र नारायण का निधन हो गया। इतनी कमाऊ रियासत पर …

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राजीव गांधी: मिस्टर क्लीन या मिस्टर भ्रष्ट?

इंदिरा गांधी की हत्या के कुछ ही घंटों बाद 31 अक्टूबर 1984 को राजीव गांधी भारत के प्रधानमंत्री बनाए गए। डेढ़ महीने बाद ही दिसंबर में लोकसभा चुनाव हुआ और इंदिरा गांधी की हत्या से उपजी सहानुभूति की लहर में कांग्रेस को ऐतिहासिक बहुमत मिला। लोकसभा की 541 में से 414 सीटें कांग्रेस ने जीतीं। कांग्रेस को सीटें इतनी ज्यादा मिली थीं कि लोकसभा में न तो कोई अधिकृत विपक्षी दल था और न कोई नेता प्रतिपक्ष। राज्यसभा में भी कांग्रेस का ही बहुमत था। राजीव गांधी में वाकई कोई अनुभव और क्षमता होती, तो इतने बड़े बहुमत के द्वारा वे …

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